*प्रयागराज, 13 मार्च ।*
देश में सीमांत और छोटी जोत वाले किसानों की संख्या सर्वाधिक है । सीमित आय वाले इन किसानों को खेती-किसानी में कई तरह की आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है । केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकार इन्हें कई तरह से सहयोग कर रही है। पीएम किसान सम्मान निधि इसी का एक हिस्सा है जिसकी 22 वीं किस्त अन्नदाता के खाते शुक्रवार को पहुंच गई। जिले के संगम सभागार में इस अवसर पर पीएम मोदी द्वारा किसान सम्मान निधि वितरण का सीधा प्रसारण लाभार्थियों को दिखाया गया।
*5 लाख से अधिक किसानों के खाते में आई पीएम किसान सम्मान निधि की 22 वीं किस्त*
डबल इंजन की सरकार की तरफ से दी जा रही आर्थिक मदद का अन्नदाता का इंतजार शुक्रवार को खत्म हो गया । लघु और सीमांत किसानों के लिए लागू की गई पीएम किसान सम्मान निधि की 22 वीं किश्त सीधे उनके खातों में जारी कर दी गई है।
प्रयागराज के कृषि उपनिदेशक पवन कुमार विश्वकर्मा बताते हैं कि प्रयागराज जिले में प्रयागराज जिले 5,81,022 अन्नदाता को 22 वीं किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिला है। किसान सम्मान निधि की 22 वीं किस्त के रूप में उनके खाते में 170.66 करोड़ की धनराशि उनके खाते में डीबीटी कर दी गई है।
*प्रतिवर्ष तीन किस्त में दी जाती है छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता*
शुक्रवार को जारी हुई पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त से उत्तर प्रदेश के 2.15 करोड़ किसान लाभान्वित हुए हैं । इन किसानों के खाते में 4335.11 करोड़ की धनराशि पहुंच गई । योजना की धनराशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के खाते में हस्तांतरित की जाती है। इसमें पात्र किसान परिवार के एक सदस्य को प्रतिवर्ष छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता वर्ष में तीन किस्त में प्रदान किए जाने की व्यवस्था है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को असम से सम्मान निधि की 22 वीं किस्त जारी की।
*खेती-पशुपालन के लिए संबल बनी जारी धनराशि *
कुछ वर्षों पहले खेती में बढ़ती लागत के चलते तेजी से गांवों में खेती से किसान दूर हो रहे थे। लेकिन डबल इंजन की सरकार की तरफ से पीएम किसान सम्मान निधि योजना आने के बाद स्थितियां बदली हैं। योजना से मिलने वाली आर्थिक मदद से अब खेती की और उम्मीद बढ़ गई है। खाद और बीज के लिए जो किसान पहले साहूकारों से कर्ज लेते थे अब उन्हें साहूकारों पर नहीं निर्भर होना पड़ रहा है। उनके खाते में आने वाली किसान सम्मान निधि से उनका काम आसानी से हो जाता है। खेती के साथ ही पशुपालन में भी यह निधि प्रयोग में लाई जा रही है। सम्मान निधि मिलने से किसान समय पर खाद-बीज खरीद लेते हैं और अगेती फसल लेने लगे हैं। जिससे उनका फसल उत्पादन बढ़ने लगा है और अन्नदाता की आय लगभग दोगुनी हो गई है।





